This is another form of GARI known as Ram GARI. In it, Bride's friends say, "at this side Ganges and another side Jamuna. In between there is Gardening. O, Raghunath Ji! Blessed that your feet have come to us here. We are keeping the golden purg (PEEDHA) in the courtyard, you Sit on it. SAMADHI RAJA is eating food. SAMADHIN is airing them with feathers. PUAA, PURI, cooked BADA is made and are offering SAMADHI (Thakur Ji) as an offering. "SAKHIYA says, "Those who sing this GARI will get an immediate heaven."
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Bhojpuri Lok Geet |
Here are the lyrics of the "Eh Paar Ganga Oh Paar Jamuna" Bhojpuri folk Song.
-राम गारी -
एह पार गंगा ओह पार जमुना,
बिचवा लागल फुलवारी
रघुनाथ कुँवर जी...
चरण कमल बलिहारी, रघुनाथ कुँवर जी...।
सोने के पीढ़ई आँगन लागी डासी,
बइठसु लाल बिहारी
रघुनाथ कुँवर जी...।
जेवही बइठले समधि राजा,
समधिन बेनिया डोलाई
रघुनाथ कुँवर जी...।
पुआ, पूड़ी, पाकल, बारा,
ठाकुर भोग लगाई...
रघुनाथ कुँवर जी...
जे इहो गारी गाई सुनाई,
से बयकुण्ठ में जाई
रघुनाथ कुँवर जी...।
शब्दार्थ :
1. डासी = बिछाना, बैठने को देना
भावार्थ :
यह एक राम गारी है। इसमें सखियां कहती हैं, "इस पर गंगा है और उस पर जमुना है। बीच में फुलवारी लगी हुई है। हे रघुनाथ जी! आप धन्य हैं कि आपके चरण हमारे यहां आए हैं। हम लोग सोने की पीढ़ा आंगन में रख रहे हैं, आप इस पर बैठें। समधी राजा भोजन कर रहे हैं। समधिन उनको पंखों से हवा कर रही हैं। पुआ, पूड़ी, पागल बड़ा (दही बड़ा) बना हुआ है और समधी (ठाकुर जी) को भोग लगा रहे हैं।" सखियाँ कहती है, "जो लोग इस गारी को गायेंगे उनको तुरन्त बैकुण्ठ मिल जायेगा।"
[Traditional Tune of this Song]
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