This song is the 'Sumiran' song of the GARI. In this, Women pray Lord Shankar
to Goddess Parvati as well as all gods and goddesses. She prays that both Lord
Ganesha and Saraswati reside in my throat. It also requires the support of
avatar men like Brahma and Vishnu. She then says, "I have the support of
Mother Saraswati in my tone and also of Shri Krishna's flute". Apart from
this, she also prays to the earth, DIH Baba, and the Digpalas of ten
directions. She also worships the blue sky above. She believes that if
gentlemen will sit and listen to her GARI, then understand that all the gods
have come to her house.
![]() |
Bhojpuri Lok Geet |
Here are the lyrics of the
"Vinayi Shiv Shankar Bhawani" Bhojpuri folk
Song.
- सुमिरन गीत -
विनई शिव शंकर, भवानी,
संगे - संगे सभ देव, महरानी,
विनई ...।
कंठे गनेस सुरसती मोर विराजसु,
बरह्मा, विसुन, आवातारी,
विनई ...।
कंठे सुर सुरस्वती हो सहइया,
धूनि में बंसुरी बनवारी,
विनई ...।
नीचे धरती, डीह, दसो दिसपालक,
ऊपरा सरग असमानी,
विनई ...।
सभदेवता घर बइठल आवसु,
जब सुनिहे सजन लोग गारी,
विनई ...।
शब्दार्थ :
1. विराजसु = निवास करे (Be seated)
2. आवातारी = अवतार धारण करने वाला (Incarnate)
3. धूनि = धुन (Tune)
4. डीह = एक लोक देवता (Folk god)
5. सरग = आकाश (Heaven)
6. असमानी = नील रंग का (Bluish)
भावार्थ :
यह गीत गारी का 'सुमिरन' गीत है। इसमें नारी शंकर भगवान माता पार्वती
के साथ-साथ सभी देवता और देवियों की प्रार्थना करती है। वह प्रार्थना
करती है कि मेरे गले में गणेश और सरस्वती दोनों निवास करें। उसमें
ब्रह्मा और विष्णु जैसे अवतारी पुरुषों का सहयोग भी अपेक्षित है। वह फिर कहती
हैं, "मेरे सुर में मां सरस्वती का सहयोग मिले और श्री कृष्ण की
बांसुरी की भी"। इसके अलावा नीचे वह धरती, डीह बाबा और दसों दिशा के
दिग्पालों की भी प्रार्थना करती है। वह ऊपर नीले रंग के आसमान की भी
वंदना करती है। वह मानती है कि अगर सज्जन लोग बैठकर उसकी गारी को सुनेंगे, तो
समझो कि सभी देवता उसके घर में आ गए हैं।
[Traditional Tune of this Song]
Subscribe to Us on YouTube
1 Comments
Interesting and useful keep it up
ReplyDelete